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#kashmir crisis, #BJP, #NAREDRA MODI

काश गाली और गोली से नहीं बल्कि कश्मीरियों को गले लगा कर आगे बढ़ा गया होता!!

Photo credit to the hindu

मैने सोच रखा था कि मोदी हुकूमत के हालिया ‘ऐतिहासिक कदम‘ पर कुछ न लिखूंगा, फर्क भी क्या पड़ता है, यह हुकूमत तो पढ़ाई-लिखाई का कुछ परवाह भी नही करती, इसको तो सिर्फ हर चीज़ को ‘ऐतिहासिक‘ बनाना होता है चाहे वह ऐतिहासिक ग़लती ही क्यों न हो, हमने देखा जी0 एस0 टी0 भी लागू किया गया तो उसको भी ऐतिहासिक बनाया गया, नोट बन्दी भी की गयी तो उस को भी ऐतिहासिक के साथ साहसिक कदम बनाया गया, हालांकि इतिहास गवाह है कि दोनो से आम जन को पीड़ा और प्रताड़ना दोनों से गुज़रना पड़ा, और धारा 370 और 35 ए0 को क्रुरता, छल और बल के साथ निलंबित करके, इसको भी ऐतिहासिक और साहसिक कदम बताया जा रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसका भी हश्र इस हुकूमत के दूसरे तमाम मास्टर स्ट्रोक की तरह हो??

लेकिन मुझे कुछ लिखने पर विवश होना पड़ा, क्योकि एक चाय की दुकान पर एक मोदी प्रशंसक- जिन को आम भाषा में मोदी भक्त कहा जाता है- से कुछ ज्ञान की बातें मालूम हुई, उनका कहना था कि जब देश एक है तो ध्वज भी होना चाहिए और मोदी सरकार ने एक देश एक ध्वज का सपना साकार कर दिया। अब कश्मीर में तिरंगा शान से लहराएगा ।
अब उन्हें कौन समझाए कि कश्मीर अब भी अगर तिरंगे के साथ अपना अलग झंडा रखना चाहे तो रख सकता है, कश्मीर ही क्यों बल्कि पूरे भारत में कोई भी प्रदेश अगर राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपने प्रदेश का कोई अलग झंडा रखना चाहे तो भारतीय संविधान में इसका प्रावधान है। अन्यथा भाजपा वाले कमल वाला झंडा और कांग्रेस वाले हाथ के पंजे वाला झंडा और अन्य राजनीतिक दल अपना अपना झंडा नही रख पाएंगें और धार्मिक झंडों को भी इसी तरह समझा जाए।

मोदी हुकूमत का यह कदम ऐसा नहीं है जिस पर हैरानी जाहिर करते हुए कहा जाए कि ऐसा क्यों कर दिया, क्यूंकि जिस दिन यह हुकूमत भारी बहुमत के साथ दोबारा चुन कर आई, बुद्धजीवियों और लेखकों ने इसकी आशंका उसी दिन जाहिर कर दी थी कि धारा 370 हटाने का प्रयास किया जाएगा, कियुंकि भाजपा बहुत दिनों से इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में रखती चली आई है, लेकिन किसी के फरिश्तों को भी नहीं मालूम था कि इतने भयानक अंदाज मे हटाया जाएगा..

धारा 370 निष्प्रभावी होने के दिन से अब तक इसे लेकर दो बातें हो रहीं हैं,पहली यह कि आज तक घाटी में जितनी भी अप्रिय घटनाऐं हुईं या जितनी भी गरीबी,बेरोजगारी,उग्रवाद और पिछड़ापन है सबका एक मात्र कारण धारा 370 और 35 ए0 थीं, दूसरी बात यह कि इसकी वजह दूसरे राज्यों के लड़के कश्मीरी लड़कियों से शादी नही कर पाते थे,और वहां पर घर नही बना पाते थे,इन दोनों बातों का जिक्र स्वयं गृह मंत्री की तकरीर में मौजूद था।
Photo credit to Google 

पहली बात : अनुच्छेद 370 विकास के पहिये का रोड़ा था 

5 अगस्त 2019 से पहले दुनिया यही जानती थी कि कश्मीर समस्या के ऐतिहासिक कारण हैं लेकिन भाजपाइयों ने सबको नकारते हुए धारा 370 को एकमात्र कारण बना दिया, हैरत की बात है कि अपनी आदत के मुताबिक आतंकवाद के लिए पाकिस्तान की भूमिका भी धारा 370 की तुलना में कम कर दिया, तो क्या अब यह माना जाये कि इस फैसले के बाद आतंकवाद, गरीबी और पिछड़ापन कश्मीर के लिए एक पुराना किस्सा होने वाला है जिसे कश्मीर की मौजूदा पीढ़ी अपनी आने वाली पीढ़ी को कहवा की चुस्की लेकर सुनाया करेगी? क्या वास्तव में कश्मीर भारत के अन्य सभी राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा गरीब और पिछड़ा है? पहले सवाल का मेरा जवाब है मैं नही जानता और दूसरे का जवाब है मैं नही मानता! 
भारतीय गुप्तचर संस्था रॉ के पूर्व प्रमुख ए. एस. दुलत का कहना है:
'हो सकता है सरकार का यह कदम सही हो लेकिन यह वक्त ही बताएगा. लेकिन जैसा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम कहते हैं, “जिन लोगों ने यह काम किया है (370 हटाने का) एक दिन वे लोग ऐसा करने के लिए पछताएंगे. मैं आशा करता हूं कि उनके पछतावे की नौबत न आए.” मैं भी एकदम ऐसा ही महसूस कर रहा हूं. एक ऐसे आदमी के बतौर जिसने कश्मीर को देखा है और सुरक्षा और आतंकवाद के मामले पर काम किया है, मुझे डर है कि हालात बदतर होंगे. आतंकवाद बढ़ेगा. मुझे नहीं लगता कि ऐसा तुरंत होगा लेकिन आगे ऐसा होगा.
क्या यह कहना सही है कि धारा 370 की वजह से कश्मीर का विकास थमा हुआ था,यह बात सही है कि कश्मीर में प्रति व्यक्ति आय (Per capita income) राष्ट्रीय औसत से कम है। लेकिन देश के कई निहायत अहम राज्यों से कहीं ज्यादा है, वह भी ऐसे राज्य जहां पर बीजेपी ने एक नही अनेक बार सत्ता में रहकर विकास की गंगा बहाई है, जैसे मध्य प्रदेश,झाड़खण्ड,उत्तर प्रदेश, बिहार वगैरह।
इसके अलावा मानव विकास सूचकांक(Human development index) में कश्मीर देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित राज्यों की सूची में ग्यारहवें स्थान पर है और बाकी राज्यों को छोड़ये गुजरात भी कश्मीर से पिछड़ा हुआ है, जिसके मॉडल का ढिढोरा माननीय प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी वाले दुनिया भर में घूम—घूम कर पीटते रहते हैं, चलिए आशावादी बनकर हम मान लेते हैं कि कश्मीर को और ज्यादा तरक्की देने का इरादा है,तो सवाल यह है कश्मीर ही क्यों? हमारा राज्य उत्तर प्रदेश क्यों नही, जहां से सबसे ज्यादा लोकसभा सदस्य आते है, खुद माननीय प्रधानमंत्री भी उत्तर प्रदेश ही से लोकसभा सदस्य चुने गये हैं, और वह अति पिछड़े राज्यों की सूची में आता है, बिहार क्यों नही? जो सबसे ज्यादा पिछड़ा प्रदेश है।
बात धारा 370 हटने की नही है बल्कि मानवाधिकार की है, इन्सानियत की है, क्या जिस बेरहमी के साथ और धोके में रख कर इसे अन्जाम तक पहुंचाया गया है, उसे नैतिक कहा जा सकता है, पूरे कश्मीर को ठप कर दिया गया,इन्टरनेट बंद, मोबाइल फोन बंद,लैंडलाइन टेलीफोन बंद, दुकानें बंद, स्कूल बंद……… . बंद,बंद,बंद…… सब कुछ बंद और उपर से कहा जा रहा है कि कश्मीरी इस फैसले से बहुत खुश हैं।
तुम्हारा शहर तुम्हीं मुद्दई तुम्हीं मुंसिफ़ 
काउंटर करेंट डाट आर्ग (countercurrent.org) नामी बेव साइट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित किया गया जिस में 9 अगस्त से 13 अगस्त तक कुछ अक्टिविस्टस ने धाटी में रहकर वहां के हालात को दिखाया है, रिपोर्ट के अनुसार भाजपा के प्रवक्ता के अलावा धाटी का कोई एक आदमी भी फैसले से खुश नही दिखा, चाहे वह कश्मीरी पंडित हो या मुसलमान या कोई अन्य।
खौफ और दहशत के साये में जिन्दगी कैसी होती है, ट्वीटर के खलिहर लोग इसे नही समझ पाऐगें,बी0 बी0 सी0 ने एक विस्थापित कश्मीरी पंडित का लेख छापा है, इतना भयानक माहौल बनाकर धारा 370 खत्म करने पर जश्न मनाने वालों को उसे एक बार जरुर पढ़ना चाहिए, और रात के सन्नाटे में दिल पर हाथ रखकर सोचना चाहिए कि खुदा न ख्वास्ता अगर ऐसे हालात उन पर और उनके घर वालो के लिए पैदा कर दिये जाएं तो वह कैसा महसूस करेंगे ??
श्वेता कौल विस्थापित कश्मीरी पंडित के लेख का कुछ अंश नकल कर रहा हुं।
जब मेरे परिवार ने कश्मीर से पलायन किया तो मैं सिर्फ़ पांच बरस की थी. मुझे अच्छी तरह याद है सड़क पर जाते हुए कर्फ्यू का अचानक लग जाना और फिर मुख्य रास्तों के बजाय गलियों से होते हुए वापस घर पहुंचना, आंसू गैस के गोले, बंदूक़धारी दहशतगर्द.—————कश्मीर से पलायन किए हुए आज लगभग 30 साल का समय बीत चुका है. इतने अरसे बाद भी मैं उस ख़ौफ़नाक मंज़र को अपने ज़ेहन से निकाल नहीं पाई हूँ.
अगर मेरे ये ज़ख्म आज भी इतने ताज़ा हैं तो सोचिए कश्मीर में उन मासूम बच्चों का क्या हश्र होता होगा जो बन्दूक़ के साये में बड़े हो रहे हैं? उस मासूम बचपन पर क्या बीतती होगी जिसे 'दुश्मन' बताकर पेलेट गन से टार्गेट किया जाता है?
उस नौजवान का क्या हश्र होता होगा जिसे महज़ शक के आधार पर हिरासत में लिया जाता है? कैसा महसूस होता होगा उन कश्मीरी औरतों को जिनके पति या जवान बेटे कभी हिरासत के बाद वापस लौटकर नहीं आते?
मुझे तकलीफ़ होती है उन लोगों से जो अपने ही देश के नागरिकों की तकलीफ़ों पर जश्न मनाते हैं. कश्मीरी पंडितों को ढाल बनाकर कश्मीर के मुसलमानों पर होने वाली ज़्यादती को पहले भी जायज़ ठहराया जाता रहा है. अब तो सांप्रदायिक नफ़रत का उन्माद अपने चरम पर है.
एक कश्मीरी पंडित होने के नाते मैं पुरज़ोर तरीक़े से इसका प्रतिकार करती हूँ. मेरी पहचान के नाम पर किसी भी तरह की नाइंसाफ़ी को जस्टिफ़ाई करने की कोशिशों का हिस्सा बनना मुझे क़त्तई मंज़ूर नहीं.
पीड़ित होने का मतलब ये नहीं कि मैं किसी और की तबाही का जश्न मनाऊँ. मुझे ये देखकर दुख होता है कि मेरे नाम और मेरी पीड़ा का इस्तेमाल इंसानियत के उसूलों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है.

दूसरी बात: कश्मीर की लड़कियां , कश्मीर की ज़मीन….

हमने इतिहास में पढ़ा है कि जब कोई राजा किसी राज्य को जीतता था तो मर्दों को कत्ल करवा देता था और औरतों और लड़कियों दासी बना लेता था…. यानी उनको ज़न और ज़मीन से मतलब होता था …
यह बात बस ऐसे ही लिख दिया, भाजपा वाले राजा या शहंशाह नहीं, वो लोग तो जनता के सेवक हैं, यानी नौकर, जिन को पांच साल के लिए जनता ने चुना था और फिर एक बार मौका दिया है, हो सकता है आगे भी इन्हें मौका मिले, लेकिन यह रहेंगे जनता के सेवक ही, उसके भी जिसने इन्हें वोट दिया और उसके भी जिसने इन्हें वोट नहीं दिया… भारत एक लोक तांत्रिक देश है….
लेकिन ये बड़ी खतरनाक मानसिकता है कि भाजपा के एक विधायक और मुख्य मन्त्री ने अनुच्छेद 370 और 35 A हटने के बाद कश्मीर की लड़कियों से अपने कार्य कर्ताओं की शादी की बात कही, और साथ ही कश्मीर में प्लाट खरीदने की बातें गर्दिश में रहीं, यहां तक कि किसी ने व्यंग करते हुए लिखा कि जिनको लाख जतन के बावजूद गली की कुड़ी भी भाव नहीं देती वो भी कश्मीर की कली का सपना देख रहे हैं और जो तंबाकू भी दूसरे से मांग कर खाते है, कश्मीर मे प्लाट खरीद रहे हैं, यानी भाजपा सपनों की सौदागरी करती है,और कार्यकर्ता उसी मे मस्त रहते हैं…..
शर्म से डूब मरना चाहिए हरियाणा के चीफ मिनिस्टर मिस्टर खट्टर और उनकी खटारी सरकार को, जिनका राज्य लिंग अनुपात मे भारत के तमाम राज्यों में सबसे निचले पायदान पर है, कश्मीरियों को जलील करने के चक्कर में, उनकी इस तरह की टिप्पणी, उन्हीं के राज्य में लड़कियों की भ्रुण हत्या के मामले बढ़ा सकती है..
लड़कियों और औरतों के मामले में ये साहब और इनके नेता और समर्थक कितने संवेदनहीन हैं इसका अनुमान बलात्कारी बाबा राम रहीम वाले केस ही से लगा लेना चाहिए, जिसे यह लोग अपने चुनावी फायदे के लिए जेल से बाहर लाने की फिराक में हैं…
मैंने जब इस मामले को समझने के लिए अध्ययन करना और हालात पर निगाह रखना शुरू किया तो मुझे मिला कि अनुच्छेद 370 पहले ही से कमजोर हो चुका था, संविधान की बहुत सी धाराएं कश्मीर मे लागू हो चुकीं थीं, तो फिर क्यूँ नहीं वही तरीक़ा अपनाया गया जो पहले अपनाया जाता रहा है, यानी वहां के जनप्रतिनिधियों को विश्वास मे लेकर????
लेकिन कश्मीर की ल़डकियों से शादी वाली बात से पूरा मामला समझ में आने लगा कि इस पूरे ड्रामे का उद्देश्य कश्मीरियों को जलील करना है, चाहे स्पेशल स्टैटस खत्म करना हो या…… क्या कोई अपने अभिन्न अंग से ऐसा सुलूक करता है????
काश गाली और गोली से नहीं बल्कि कश्मीरियों को गले लगा कर आगे बढ़ा गया होता!!! 

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